अंग्रेजी एक भाषा है, लेकिन आजकल विद्यालय इसे केवल एक विषय मानकर पढ़ाते है। जैसे- हम गणित में पेपर और पेन से कोई भी समस्या हल कर सकते है, वैसे कोई भाषा नहीं सीखी जा सकती है।
जब कोई व्यक्ति मातृ भाषा सीखता है तो वह सबसे पहले बोलना - पढ़ना - लिखना अंत में सीखते है, लेकिन अंग्रेजी या अन्य भाषा सीखते समय इसकी विपरीत प्रक्रिया अपनाने की कोशिश की जाती है सबसे पहले शब्दों को लिखना फिर पढ़ना फिर बोलना और अंत में अपनी मातृ भाषा में अनुवाद करना।
आपने स्वयं ध्यान दिया होगा, कि हम जब अपने किसी रिश्तेदार के घर जाते है, जो थोड़ी अलग बोली (एक ही भाषा का दूसरा संस्करण) बोलते है, तो वहाँ हम Notebook 📔 और Pen 🖋 लेकर नहीं बैठते है। फिर हम कुछ दिनों बाद उनकी लगभग सभी बातें कैसे समझ जाते है।
कोई भी व्यक्ति अपनी मातृ भाषा में पूर्ण ज्ञाता नहीं हो सकता है, तो वह अंग्रेजी को 30 दिनों में पूर्णता कैसे सीख सकता है। क्योंकि सैंकडो वर्षों से अपने अंदर शब्द जोड़ते आ रही है। अत 30 दिनों में सामान्य व्यक्ति को जितनी अंग्रेजी काम आती है, उतनी ही सीखी जा सकती है।
